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मोक्ष प्राप्ति क्या होता है? मोक्ष प्राप्ति का भावार्थ क्या है?
प्रभु प्रेमियों ! "कल्याण - पाद महर्षिजी ने वेद - काल से लेकर आजतक के मोक्ष - दर्शन को चार प्रकोष्ठों में प्रतिष्ठित किया है और उसका नाम रखा है- ' सत्संग - योग , चारो भाग ' और उनके अनुभव ज्ञान की वाणियाँ गम्भीर सरलता में अभिव्यक्त होकर ' मोक्ष - दर्शन ' नाम धारण कर आज मुमुक्षुजनों में अमृत - वितरण के लिए प्रस्तुत है ।" प्रकाशक (मोक्ष-दर्शन) "सामान्यतः ' मैं हूँ ' का ज्ञान मनुष्य को स्वतः होता है । उसको यह जानने में कठिनाई नहीं होती कि वह शारीरिक , मानसिक और सांसारिक बंधनों एवं विकारों से जकड़ा हुआ है । परिणाम स्वरूप स्वतंत्रता रहित होने के कारण वह शांतिमय सुख से वंचित रहता है । इस हेतु उपर्युक्त बंधनों , विकारों एवं कष्टों से छूटने तथा आत्म - स्वतंत्रता का शांतिमय स्थिर सुख लाभ करने का ज्ञान और उसकी युक्ति उसे अवश्य प्राप्त करनी चाहिए , जो संतों के संग और उनकी सेवा के सिवाय अन्य कहीं से प्राप्त होने योग्य नहीं है ।" मोक्ष - संबंधी पर्याप्त ज्ञान के हेतु मैंने वेदार्थ , उपनिषद् , संतवाणी तथा अन्यान्य सद्ग्रंथों का अध्ययन किया । श्रीसद्गुरु महाराजजी का संग तो था ही , इसके अतिरिक्त यत्र - तत्र भ्रमण करके मैंने अन्य महात्माओं का भी सत्संग किया । वर्णित सद्ग्रंथों में से मोक्ष - विषयक सद्ज्ञान का संग्रह कर उसे तीन भागों में विभक्त कर दिया । ( और जाने )
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size/21.5cm/14.5cm/1.1cm/L.R.U.




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